Tuesday, September 8, 2015

हम तो चले जा रहे ज़िदगी के इस बहाव मे........

हम तो चले जा रहे ज़िदगी के इस बहाव मे,
सिख रहे हे जीना ज़िदगी के हर बदलाव मे !
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जो मिला हे वो भी मुककम्ल ही समझो,
वरना हो बहुत बडे-2 अरमान थे चहाव मे ,

कडवे अनुभव मीठा कर देते हे ज़िदगी,
क्या समझोगे अगर हरदम रहोगे छाव मे

ज़िदगी उसने मुफ्लिस मे केसे गुजारी,
पूछ उनसे भी जख्म  लगे हे जिनके घाव मे,

जिसका शोक बस चलते रहना हे ,
उनसे दोर गुजरता नही यू इस ठहराव मे!!!!

पवन

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