Friday, September 18, 2015

चलो एक अपना शहर बसाया जाये

चलो एक अपना शहर बसाया जाये,
जहा सिर्फ़ मोहब्बत ओर अपनापन हो
...........................................................
.........................................................
उदास यू क्यू यहा चेहरे,
हर टूटी उम्मीद को जगाया जाये,
दिल से दिल की बात हो,
हर उदास दिल को दिल मे बसाया जाये,
यहा एक अपना शहर बसाया जाये
चलो हरदम मुस्कुराया जाये सबको हसाया जाये
जहा इश्क बदनाम ना हो,
ज़िदगी सिर्फ़ दोलत का नाम ना हो,
इन्सान की यू हसरत गुमनाम ना हो,
शोहरत रुतबे ही सब कुछ तमाम ना हो,
यहा एक अपना शहर बसाया जाये
चलो हरदम मुस्कुराया जाये सबको हसाया जाये
जहा पर दिल समझने मे आसान हो,
तेरे हर जख्म भी मेरे दिल के निशान हो,
हम पास रहकर एक दूसरे ना अज़ान हो,
दिलो मे उम्मीदे ज़िदा हर अरमान हो ,
यहा एक अपना शहर बसाया जाये
चलो हरदम मुस्कुराया जाये सबको हसाया जाये
p@W@n

No comments:

Post a Comment