Monday, June 6, 2016

मुझे शोक हे आज भी सिर्फ़ खुद मे जीने का,

इस जमाने मे यू भी खुद को किस कदर सभाल रहा हू,
सच कहता हू उतनी ही जमाने की नफरत पाल रहा हू.
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मेरे जुनून मेरा शोक देख तू मे बदला नही,
मे वो नही जो आज भी सिक्को पे किस्मत उछाल रहा हू,


मुझे मालूम हे मै क्या था, ओर आज क्या हू,
तेरी ये महफ़िले तुझे मुबारक ,मालूम कर मै कल कीतना कमाल रहा हू

मुझे शोक हे आज भी सिर्फ़ खुद मे जीने का,
पर आज अफसोस बेवजह क्यू ये वक्त मे तुझमे निकाल रहा हू.

जनता हू ये राहे मूशिक्ल हे ,,जमीन बजर हे ,
पर हर उम्मीद के दरमियान बीज आज भी मे वही डाल रहा हू,

आज भले ये रग जमाने मे ढल जाएगा,
क्ल की वो सादगी, सच्चाई , अच्छई मे एक मिसाल रहा हू
p@w@n

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