Tuesday, April 4, 2017

बडा ही सरल हे ये सफर भी तेरे दरमियान !

हूनर तेरा हे जिकर तेरा हे ,
बात तेरी हे असर तेरा हे ,
शायरी मे रवानियत तो होगी,
ये इकरार तेरा हे आज इतजार तेरा हे !!!
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मूशिक्ल,मजबूरी चाहत खवाब की ये ज़िदगी,
हा मान ले जीने मे कम अभी ईतजाम तेरा हे

खुद को क्यू यहा हरदम कम समझा तूँने,
जायज ही मानूगा ये खुद पर जो इल्ज़ाम तेरा हे ,

बडा ही सरल हे ये सफर भी तेरे दरमियान,
मोहब्बत नाम , अगर सफर मे सिर्फ़ यही अजाम तेरा हे

खुब हे मजा ज़िदगी के दरमियाँ खवाहिशे जीने मे,
निकल चल यहा रुक मत ये मान आखरी जाम तेरा हे
पवन

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