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कयामत ...

तूफ़ान..

बड़े बड़े शहर की ...

Koi shayar hoga !!

लिखा हुआ हर ल्फज़ तो गहरा हे

सुकून मिले जहा पा ले कुछ

ये बंदिशों में जकड़ा केसा समाज बना दिया

बड़ी मजिलो के यहाँ इंतकाम बड़े बड़े !

सफ़र

खटकता हे मेरा हुनर जमाने को

मैं हजार ख्वाहिशें लेकर बैठा हूं

हो जायेगे बहुत इल्जाम हासिल