Monday, December 21, 2015

मिलता ये शहर मे सब ,,वफादार घर नही मिलता !!!

मिलता ये शहर मे सब ,,वफादार घर नही मिलता
राह मजिले वही, यहा कोई रहबर नही मिलता !!!
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नुमाइश् की इस ज़िदगी मे सादगी की मिसाल दोगे,
मिले मुकम्मल ये बात ऐसा मुझे दर नही मिलता ,


चलती हे ज़िदगी खुद से समझोते के साथ ,
बचा रह पायेगा हर सच ये अब असर नही मिलता,

इश्क मोहब्बत के फलसफे यहा रोज बनते,
चाहे जो उमर भर सिर्फ़ मुझे, दिल इस कदर नही मिलता

ज़िदगी तो एक पहेली बन बेठी हे,,,
भागदोड सी इस ज़िदगी मे सुकुन पल भर नही मिलता

जिसने ज़िदगी को खुबसूरत हर मुमिकन चाह बनाना,
कभी वक्त कम पडता, कभी इतना सबर नही मिलता
@pawan

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